शनिवार, 8 अगस्त 2015

पैसे की गुलामी (Slavery of Money)

Slavery, Money

जीवन जीने के लिए एक महत्वपूर्ण चीज़ पैसा है जिसके बिना आज के समय में जीवन जीने की कल्पना करना भी असंभव है।  आज हम एक ऐसी दुनिया में रहते है जहाँ हमें हर जरुरी चीज के लिए बाज़ार पर निर्भर रहना पड़ता है।  पहले के समय में ऐसा नहीं था, लोग बहुत सारी जरुरी चीज़े खुद ही उगाते थे या अपने समान को बदल कर दूसरा समान ले लेते थे।  आज हम हर चीज़ के लिए केवल बाज़ार पर ही आश्रित है और बाज़ार में पैसा चलता है।

दुनिया भर की सरकारे भी ऐसी आर्थिक व्यवस्था को बढ़ावा दे रही है जिसमें बाजारवाद को बढ़ावा मिले।  इस कारण पैसे का महत्व बहुत ही अधिक बढ़ता जा  रहा है।  इस आर्थिक व्यवस्था को बढ़ाने और चलाने के लिए लोगों को उपभोक्ता की तरह इस्तेमाल किया जाता है।  पैसे के इर्द गिर्द इतनी जटिलतायें बुन दी जाती है कि एक इंसान पूरी जिंदगी पैसे को कमाने में और इसकी चिंता में नष्ट देता है।

पैसा का हमेशा ही जीवन में एक महत्वपूर्ण स्थान रहा है पर आज के समय में यह बहुत ही अहम स्थान पर पहुंच गया है और इसके बिना जीवन जीने की कल्पना भी नहीं की जा सकती।  आज लोग हर छोटी और बड़ी चीज़ के लिए बाजार पर निर्भर है और उसके लिए पैसा चाहिए।  इस तरह की अर्थव्यवस्था से बड़े उद्योगपतियों को खूब फायदा हो रहा है पर लोग पैसे के जाल में फँसते जा रहे है।

पहले के समय में लोग पैसे का बहुत काम इस्तमाल करते थे और जीवन यापन की बहुत सारी चीज़े अपने आस पास से बिना पैसे के ही हासिल कर लेते थे।  पर आज लोगों में पैसे की ग़ुलामी को स्वीकार कर लिया है और वह पूरा जीवन इसी का पीछा करते हुए बिता देते है।  हमारे पैसे के लेनदेन मात्र से ही कई लोग अमीर हो जाते है।  हमारे पैसे के लेनदेन से बैंक मुनाफा कमाते है और सरकारों को टैक्स लगाने का मौका मिलता है।

इस तरह की अर्थव्यवस्था में हम बिना जाने अपने लिए कम और दूसरों को अमीर बनाने के लिए अधिक काम करते है।  हमारे ही मेहनत से बिना किसी मेहनत के आर्थिक संस्थाए और बड़े उद्योगपति अमीर हो जाती है।  पर समस्या यह है कि बहुत ही काम लोग इस बात को अपने जीवन काल में समझ पाते है और पूरा जीवन पैसे की गुलामी में नष्ट देते है।  

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