Read in English ओशो, जिन्हें भगवान श्री रजनीश के नाम से भी जाना जाता है, एक भारतीय आध्यात्मिक शिक्षक और दार्शनिक थे, जिन्होंने अपनी अपरंपरागत और विवादास्पद शिक्षाओं के लिए दुनिया भर में पहचान हासिल की। उनका जन्म 11 दिसंबर, 1931 को कुचवाड़ा, भारत में हुआ था और उनका निधन 19 जनवरी, 1990 को पुणे, भारत में हुआ था। ओशो की शिक्षाएँ ध्यान, व्यक्तिगत विकास और आध्यात्मिक ज्ञान पर केंद्रित थीं। उनका मानना था कि सभी मनुष्यों में आध्यात्मिक विकास की क्षमता है और आत्मज्ञान का मार्ग ध्यान और आत्म-जागरूकता के माध्यम से है। (ओशो पर और पोस्ट पढ़ें) ओशो पारंपरिक धर्म के आलोचक थे और उनका मानना था कि आध्यात्मिकता विश्वासों या अनुष्ठानों के समूह के बजाय एक व्यक्तिगत अनुभव होनी चाहिए। ओशो की प्रमुख शिक्षाओं में से एक वर्तमान क्षण में जीने का महत्व था। उनका मानना था कि लोगों को अतीत या भविष्य के प्रति अपना मोह छोड़कर यहां और अभी पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। ओशो के अनुसार, वर्तमान क्षण में जीना खुशी और संतुष्टि की कुंजी है। ओशो की शिक्षाओं में व्यक्तिगत स्वतंत्रता और जिम्मेदारी के महत्व पर भी जोर दिया ग...
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